अध्याय 5
लैला ने होंठ कसकर भींच लिए। सीने में कड़वाहट का सैलाब उमड़ रहा था। दिल पहले ही ज़ख्मों से छलनी था, और अब दर्द के प्रति सुन्न पड़ चुका था।
स्टैंटन परिवार में बस दो ही लोग थे जिन्होंने कभी उसके साथ इंसानियत दिखाई थी। एक सेथ के दादाजी—जो अब इस दुनिया में नहीं रहे—और दूसरी सेथ की माँ, मैरिएन स्टैंटन, जो पार्किंसन की बीमारी के कारण बिस्तर से लगी रहती थीं।
इन दो के अलावा, उसे कोई पसंद नहीं करता था—यहाँ तक कि स्टैंटन परिवार का घरेलू स्टाफ भी उससे मुस्कराकर बात करने की ज़हमत नहीं उठाता था।
हेवन सिटी में लगभग हर कोई स्टैंटन परिवार की “नापसंद” बहू के बारे में जानता था। इसलिए लोग स्वाभाविक तौर पर उसे नीची नज़र से देखते थे।
सेथ के दादाजी की मौत लैला के लिए बहुत बड़ा झटका थी। आख़िरी समय में उन्होंने सेथ और लैला—दोनों को अपने पास बुलाया था। फिर उन्होंने दोनों के हाथ एक साथ पकड़कर सेथ से वादा करवाया कि वह उम्र भर लैला का ख़याल रखेगा। उसी वादे को उससे कहलवाकर उन्होंने दम तोड़ दिया।
पर दादाजी यह कभी नहीं जान पाए कि उनके शब्द, जो लैला के लिए ढाल बने थे, उसी ने उसके लिए एक कैद भी खड़ी कर दी थी—ऐसा पिंजरा, जिससे वह सेथ से अलग होकर कभी निकल ही नहीं सकती थी।
उसी पल सेथ का फोन बज उठा। उसने जेब से निकालकर स्क्रीन देखी। उसके चेहरे के भाव पल भर में नरम पड़ गए, आँखों में अपनापन भर आया। लैला को अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं थी कि कॉल किसकी है।
“जाओ, उसके पास,” लैला ने थकी आवाज़ में कहा। “मुझे भी वैसे कुछ देर अकेले रहना है।”
सेथ का इरादा भी साफ़ तौर पर यही था। वह कॉल उठाते हुए थोड़ा दूर चला गया। लैला को उसके शब्द साफ़ सुनाई नहीं दे रहे थे, मगर उसकी आवाज़ की धीमी, मुलायम गुनगुनाहट सुनाई दे रही थी—वही मोहब्बत भरी नरमी, जो वह कभी लैला को नहीं दिखाता था।
कॉल खत्म करके सेथ कुछ कहने ही वाला था कि फोन फिर बज उठा। लैला ने मान लिया कि जेनिफर ने दोबारा फोन किया है और वह कमरे से बाहर निकलने लगी। उनसे जुड़ा कोई भी पल देखना उससे सहा नहीं जाता था।
लेकिन तभी उसके पीछे से सेथ की आवाज़ आई—“क्या? मेरी माँ को क्या हुआ?”
तीस मिनट बाद एक काली मेबाख तेज़ी से स्टैंटन मैनर के ड्राइववे में आकर रुकी। सेथ कार से कूदकर अंदर की ओर दौड़ा, और लैला उसके पीछे-पीछे। सब कुछ इतना अचानक हुआ था कि निकलते वक़्त लैला बस नाइटड्रेस के ऊपर जल्दी से एक कोट डाल पाई थी।
जेनिफर की कॉल रखते ही मुश्किल से कुछ ही पल बीते थे कि मैनर की देखभाल करने वाली ने फोन करके बताया—मैरिएन की हालत अचानक बिगड़ गई है, और परिवार के निजी डॉक्टर उनकी स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं।
दोनों एक के बाद एक सीढ़ियाँ चढ़ते हुए ऊपर भागे। लैला जब हाँफती हुई बेडरूम तक पहुँची, तब तक डॉक्टर और उनका सहायक बाहर निकल रहे थे।
“डॉक्टर, मेरी मम्मी कैसी हैं?” लैला ने घबराकर पूछा, साँस अभी भी ठीक से नहीं संभल रही थी।
“अभी के लिए स्थिति स्थिर कर दी है, लेकिन निगरानी ज़रूरी रहेगी। वो होश में हैं,” डॉक्टर ने जवाब दिया।
लैला के कंधों से जैसे बोझ उतर गया। वह कमरे में अंदर गई तो देखा, सेथ मैरिएन के ऊपर झुका हुआ था, उनका हाथ कसकर थामे। उसकी आवाज़ काँप रही थी—“माँ।”
मैरिएन का चेहरा राख-सा फीका था, होंठों में रंग नहीं था, मगर नज़र अब भी दयालु थी। दरवाज़े पर खड़ी लैला पर नज़र पड़ते ही उनके पीले चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान उभर आई। “लैला, बेटा… इधर आओ…”
लैला ने आँसुओं को रोकते हुए जल्दी से बिस्तर के पास आकर दूसरी तरफ़ से मैरिएन का हाथ थाम लिया। “माँ, आपने तो मुझे डरा दिया।”
मैरिएन की आँखें आधी बंद थीं। दोनों के हाथ थामे हुए भी उनमें इतना दम नहीं था कि वह दबा सकें। ताज़ा हालात के तनाव से उनके माथे पर अभी भी पसीने की बूँदें चमक रही थीं।
“मैं ठीक हूँ। इतनी रात को तुम दोनों को परेशान करने के लिए माफ़ करना।”
सेथ की आँखों में लालिमा उतर आई थी। “कल हम आपको इलाज के लिए सबसे अच्छे अस्पताल में शिफ्ट कर देंगे। घर पर रहना बहुत ख़तरनाक है, और डॉक्टर हर वक़्त यहाँ नहीं रह सकते।”
मैरीऐन ने पल भर के लिए आँखें मूँद लीं। “सेथ, उतावले मत हो। दो साल पहले डॉक्टरों ने कह दिया था कि मेरी हालत का इलाज अब मुमकिन नहीं है। मैं दर्दनाक प्रक्रियाओं से गुजरती रहूँ और तुम बेवजह पैसे खर्च करो—इसका कोई मतलब नहीं। मैं बस चाहती हूँ कि बाकी के दिन घर पर ही बिताऊँ।”
मैरीऐन सच ही कह रही थी, फिर भी सेथ उसे मानने को तैयार नहीं था। वह खामोश रहा, अपनी माँ का हाथ कसकर थामे हुए।
फिर मैरीऐन ने गर्मजोशी भरी नज़र से लैला की ओर देखा। “आख़िरकार तुम्हें फिर से देख लिया। लैला, तुम्हें आए बहुत वक्त हो गया। मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।”
ये सुनते ही लैला के भीतर अपराधबोध की चुभन दौड़ गई। वह कितनी बार मैरीऐन से मिलने को तड़प चुकी थी! लेकिन सेथ ने उसे मना कर रखा था—कहता था कि वह नहीं चाहता कि उसकी माँ उसे ज़्यादा चाहने लगे। उसे लगता था लैला मैरीऐन के स्नेह की हक़दार नहीं है, और उम्मीद करता था कि उन्हें दूर रखकर उसकी माँ धीरे-धीरे उसे भूल जाएगी।
लेकिन इस मामले में सेथ गलत था।
“मैं एक दोस्त की मदद में लगी थी, इसलिए मिलने का वक्त नहीं मिला। माफ़ कीजिए, माँ। मैं वादा करती हूँ, अब से ज़्यादा बार आपसे मिलने आऊँगी।”
मैरीऐन की मुस्कान और गहरी हो गई; आँखों के किनारों की झुर्रियाँ और उभर आईं, मानो उनमें अपनापन और दया भर गई हो। “अच्छा। आज रात तुम दोनों को साथ देखकर मुझे कितनी खुशी हो रही है। तुम्हारी शादी को तीन साल हो गए हैं। बच्चे कब करने का सोच रहे हो? मैं चाहती हूँ, जब तक देख सकती हूँ, तुम्हारा बच्चा देख लूँ।”
सेथ तनिक अकड़ा, फिर जवाब देने से पहले लैला की ओर एक नज़र डाल दी। “मैं काम में व्यस्त रहता हूँ, और लैला अभी कुछ साल अपनी आज़ादी का मज़ा लेना चाहती है। अभी बच्चों का कोई प्लान नहीं है।”
सेथ चाहे जो बहाना बनाता, बात आखिर में उसी पर आकर टिकती—दोष उसी के सिर। लैला अब इसकी आदी हो चुकी थी। उसकी आँखों ने उदासी जता दी, मगर उसने मुस्कान जबरन सँभाली और बोली, “आप सौ साल जिएँगी, माँ। आप हमारे बच्चों से ज़रूर मिलेंगी। आप उन्हें गाना भी सिखाएँगी, है न?”
युवावस्था में मैरीऐन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर संगीतकार रह चुकी थी, जो शादी के बाद देश लौट आई थी।
आज भी, पार्किन्सन की बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद, उसकी सुरीली आवाज़ की याद हर किसी के मन में बसी थी।
“मेरी हालत मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता। मैं बस तुम्हारे बच्चे जल्दी देखना चाहती हूँ।” मैरीऐन ने आह भरी, आँखों में तड़प उतर आई।
न जाने क्यों, आज रात लैला को मैरीऐन कुछ अलग लगी। वह बच्चों की बात पर अटकी हुई थी—जिसे वह पहले कभी इतना नहीं उछालती थी।
तभी दरवाज़े के बाहर से एलिज़ाबेथ की आवाज़ आई। “लैला, बाहर आओ! मुझे तुमसे बात करनी है।”
लैला ने हामी भरी और मैरीऐन को दो-चार तसल्ली भरे शब्द कहकर कमरे से बाहर निकल गई।
उसके जाते ही मैरीऐन का दयालु मगर थका हुआ चेहरा सख्त हो गया। “सेथ, ऑनलाइन ये क्या खबरें चल रही हैं कि तुमने जेनिफर के लिए महँगी गाड़ी खरीदी है? कहीं तुम किसी चक्कर में तो नहीं?”
सेथ ने तुरंत इंकार कर दिया। “नहीं, ये बकवास है। मैंने पहले बताया था—वो बस मेरी एक पूर्व छात्रा है, जिसकी मैंने मदद की थी।”
“तुम मेरे बेटे हो। तुम्हारे कौन से शब्द सच हैं और कौन से झूठ, मैं अच्छी तरह पहचानती हूँ।” मैरीऐन को उस पर साफ़ यकीन नहीं था।
सेथ ने बात बदलने की कोशिश की, अपनी माँ के चारों ओर कंबल और कसकर लपेट दिया। “अभी सबसे ज़रूरी है कि आप आराम करें। बाकी किसी बात की चिंता मत कीजिए।”
मैरीऐन नहीं मानी। “सेथ, खबरों में लिखा है कि तुम और जेनिफर नॉर्थ शोर हाइट्स वाले उस अपार्टमेंट में साथ रह रहे हो। क्या ये सच है?”
सेथ के माथे पर हल्की शिकन आई, मगर उसने संयम बनाए रखा और किसी भी बात को मानने से अड़ा रहा।
“माँ, ये सच नहीं है। क्या आप उन पीली-पत्रकारिता वाले रिपोर्टरों की बातों पर भरोसा करेंगी? आप भी तो कभी सार्वजनिक जीवन में रही हैं—आप जानती हैं ये लोग कैसे कहानियाँ गढ़ते हैं। आपको याद नहीं, ये लोग आपके बारे में भी कैसी-कैसी अफ़वाहें उड़ाया करते थे?”
